महुआ की सुगंध

बिन बताये अंदर आ जाता है,
पहले बीज सा, फ़िर वृहद हो जाता है ।
कमरे में उग गया हो जैसे बरगद कोई,
घाने के गुड़ सा गाढ़ा होता है वो प्रेम।

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